सामाजिक एवं धर्मार्थ

स्वामी जी अनेक सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक गतिविधियों में संलग्न रहते हैं। उन्होंने अनेक सामाजिक एवं धर्मार्थ ट्रस्ट बनाये हैं। जिनके द्वारा वे जरूरत मन्द लोगों के भोजन, दवाइयाँ तथा अन्य आवश्यक वस्तुएँ प्रदान करके मानवता की सेवा करते हैं। उनके प्रयासों से समय समय पर ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त स्वामी जी महिला सशक्तीकरण एवं निरक्षरता उन्मूलन के लिए भी अपनी परियोजनाओं एवं ट्रस्टों द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रयास करते रहते हैं। स्वामी जी के निर्देशन में कार्यरत कुछ सामाजिक एवं धर्मार्थ ट्रस्ट निम्नलिखित हैं-

सामाजिक ट्रस्ट

मैनेजिंग ट्रस्टी/चेयरमैन

  • स्वामी शुकदेवानन्द ट्रस्ट, शाहजहाँपुर
  • हिम्मत राम विमला देवी ट्रस्ट, कोलकत्ता
  • श्री स्वामी ज्ञान स्वरूपानन्द ट्रस्ट, कनखल, हरिद्वार
  • सन्त पर्थिक सेवा ट्रस्ट, हरिद्वार
  • नवोदय ट्रस्ट, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश
  • धर्म गंगा फांउडेशन, हरिद्वार
  • मुमुक्षु शिक्षा संकुल, शाहजहाँपुर

चिकित्सा संस्थाएं

  • एस0एस0 चैरिटेवल हॉस्पिटल, हरिद्वार
  • नेचुरो योगिक हॉस्पिटल, ऋषिकेश
  • परमार्थ नेचर हेल्थ सेन्टर, ऋषिकेश
  • एस0एस0 होम्योपेथिक दवाखाना, ऋषिकेश
  • स्वामी भजनानन्द ऑंख अस्पताल, मैनपुरी

आश्रम

  • परमार्थ लोक, बद्रीनाथ
  • परमार्थ आश्रम, हरिद्वार
  • परमार्थ ज्ञान मन्दिर, कनखल
  • मुमुक्षु आश्रम, शाहजहाँपुर
  • स्वामी शुकदेवानन्द आश्रम, रेनूकूट, सोनभद्र
  • परमार्थ निकेतन, स्वर्गाश्रम, ऋषिकेश
  • परमार्थ आश्रम, सप्त सरोवर, हरिद्वार
  • श्री कृष्ण आश्रम,बृजघाट, गढमुक्तेश्वर, गाजियाबाद
  • परमार्थ निकुंज, वृन्दावन
  • परमार्थ मन्दिर, सफदरगंज इन्क्लेव दिल्ली
  • परमार्थ भवन, सुखदेव बिहार, नई दिल्ली
  • आनन्द आश्रम, बरेली
  • स्वामी एकरसानन्द आश्रम, मैनपुरी
  • श्री हरिधाम, बिठुर, कानपुर
  • स्वामी भजनानन्द आश्रम, रायबरेली
  • गोपाल आश्रम, फिरोजाबाद
  • एकरसानन्द आश्रम बिरारी, इटावा

Words of Wisdom

Being Courteous

Rama was kind and courteous and never ill. To harsh words he returned no blame.
Ramayana
Retold by William Buck

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Humility and courtesy are acts of piety.
Sayings of the Prophet
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To speak kindly does not hurt the toungue.
Proverb

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Gratitude is the most exquisite form of courtesy.
Jacques Maritain