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महा कुम्भ

28 Apr, 2016 भारत अपनी विविधताओं के लिये विश्व में प्रसिद्ध है यहां के लोक जीवन में जो अनेकता दिखाई पड़ती है वह किसी अन्य देश अथवा संस्कृति में नहीं है। रीति-रिवाज, बोली-भाषा, खान-पान, रहन-सहन में भारी अंतर होने के बावजूद सदियों से यदि यह एक सूत्र में बंधा रहा तो उसके पीछे और कई कारण हो सकते हंै, लेकिन इस... more

देश की दो महान विभूतियां

26 Dec, 2015 आज विश्व जहां यीशू का जन्म दिवस मना रहा है वहीं भारत देश के ऐसे दो विभूतियों की जन्मतिथि पर विभिन्न प्रकार के आयोजन कर रहा है, जिन्होंने न केवल इस देश के इतिहास को प्रभावित किया है अपितु समाज के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को जन जीवन का अंग बनाने के लिये अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है।... more

कानून और उनका दुरूपयोग

19 Oct, 2015 पिछले पांच दिनों से मीडिया में केवल एक ही बहस चल रही है, उस बहस के ईर्द गिर्द ही देश के सभी चैनल और अखबार लोगों का मंतव्य प्रकाशित और प्रसारित कर रहें हैं। ये कोई पहली घटना नहीं है, और न ही किसी को फांसी पर लटकाने से इस सामाजिक अपराध का अन्त होगा। जो हुआ है, वह बहुत बुरा हुआ है। लेकिन इसके पहले भी... more

निर्णयः संत या सत्ता

19 Oct, 2015 गंगा के अविरल प्रवाह को लेकर अखाड़ा परिषद की चिन्ता स्वभाविक है, क्योंकि इन अखाड़ों का अस्तित्व जिन कुम्भों पर निर्भर करता है, वह हरिद्वार और प्रयाग के ऐसे कुम्भ हैं, जो पूरी तरह गंगा के अग्रिम प्रवाह पर आश्रित हैं। देश के ऐसे कितने धर्मिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और साहित्यक संगठन है, जिनका... more

भाजपाः मूल विचार धारा की ओर

19 Oct, 2015 भारतीय जनता पार्टी में अभी उत्तर प्रदेश से मिलने वाली एक मात्र राज्य सभा की सीट श्री विनय कटियार जी को आवंटित की गई। भाजपा के इस फैसले को उसकी अपनी मूल विचारधारा की ओर लौटने का इसे एक संकेत माना जा सकता है। क्योंकि पिछड़ी जातियों में भाजपा के पास दो ही हिन्दू नेता हैं जो हिन्दुत्व के मुद्दे पर... more

मंत्र की शक्ति

19 Oct, 2015 प्रयाग के इस कुम्भ में कुछ प्रमुख संतों ने देश और विश्व में व्याप्त अनाचार, दुराचार, भ्रष्टाचार और हिंसा के प्रति चिंता व्यक्त करते हुये इन सब का आध्यात्मिक निदान खोजने का प्रयास किया कई बैठकें हुई विमर्श हुआ प्रयास ये किया गया कि इस चर्चा को तब तक मीडिया और प्रचार से दूर रखा जाये, जब तक कोई ठोस... more

स्वाधीनता का अर्थ

19 Oct, 2015 भारत एक स्वाधीन राष्ट्र है आज उसके स्वाधीनता के ६५ वर्ष पूरे हो गये है और ६६ वें वर्ष प्रारम्भ हो रहा है स्वाधीनता संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को आज देश नमन कर रहा है जिन्होंनें अपने प्राण हथेली पर रख कर मातृभूमि की स्वाधीनता के लिये स्वयं का बलिदान किया उनके कुछ सपने थे हम... more

असम की हिंसा और बोडो जनजाति

19 Oct, 2015 आज भारत के दक्षिणी राज्यों में निवास कर रहे पूर्वोत्तर राज्यों के लोग भयभीत है, डरे है उन पर नियोजित ढंग से एक संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा हमले हो रहे है और उन्हें उन राज्यों से निकलने के लिये मजबूर किया जा रहा है। जब कि असम में चल रहे नरसंहार से न तो उनका कोई लेना देना है और न ही वह असम की... more

प्रधानमंत्री पद का उचित दावेदार

19 Oct, 2015 आडवाणी जी ने आज अपने एक बयान में जो सम्भवता उन्होंने अपने जन्म दिवस पर सोच समझ कर दिया हो स्वयं को प्रधानमंत्री की दावेदारी से अलग कर लिया वैसे ी लोकतंत्र में पद की अपेक्षा तो की जा सकती है, लेकिन दावेदारी का सवाल तब उठता है जब उसे बहुमत प्राप्त हो चुनाव पूर्व इस ् प्रकार की घोषणा निश्चित ही उस... more

अमृत की लालसा

19 Oct, 2015 भारत एक आध्यात्मिक देश है यहां की प्रत्येक परम्परा की पृष्ठभूमि, आध्यात्मिक सोच और संस्कार से जुड़ी हुई है। कोई भी ऐसा पर्व और त्योहार नहीं है जिसके पीछे कोई आध्यात्मिक घटना अथवा गाथा न हो वैसे भी मनुष्य के एक सामाजिक प्राणी होने के नाते आपस में मिलने जुलने और एक साथ रह कर किसी उद्देश्य विशेष के... more

शिक्षा में गुणवत्ता की जिम्मेवारी

19 Oct, 2015 कल आई०आई०एम० हल्द्वानी के दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुये देश के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी जी ने देश की उच्च शिक्ष्ा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की उन्होंने छात्रों को ध्यान आकर्षित करते हुये यह दुख व्यक्त किया कि आज विश्व के उन २०० विश्वविद्‍यालयों की सूची में भारत का नाम नहीं है, जो उच्च... more

मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरू बनने को तैयार है

19 Oct, 2015 121 वर्षों के बाद भारत की प्रतिभा का अहसास विश्‍व को एक बार पुनः हुआ जब भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संयुक्‍तराष्ट्र महासभा और मेडिसेन स्क्वायर गार्डेन में जुटे हजारों हजार लोगों को संबोधित किया। लोगों को ऐसा लगा कि भारत का वह आध्‍यात्‍मिक वैभव कायम है, जो वर्षों पूर्व विवेकानंद के... more

शब्द ब्रह्म है

19 Oct, 2015 अभिव्यक्ति की स्वाधीनता व्यक्ति को जिम्मेवार बनाती है क्योंकि तमाम जीवों में अपनी बात कहने के लिए शब्दों की शक्ति केवल मनुष्य के पास है, शब्द की इस अमोघ शक्ति का प्रयोग केवल और केवल मनुष्य ही कर सकता है। दुनिया के तमाम प्राणियों यहां तक की देवताओं के पास भी शब्द की यह शक्ति नहीं है, वे अपनी बात... more